बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मिर्जापुर के 42-वर्षीय मरीज के मुंह के एडवांस्ड कैंसर की ​कॉम्प्लेक्स सर्जरी कर ट्यूमर निकाला

बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मिर्जापुर के 42-वर्षीय मरीज के मुंह के एडवांस्ड कैंसर की ​कॉम्प्लेक्स सर्जरी कर ट्यूमर निकाला

मिर्जापुर: नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी 42-वर्षीय मरीज के मुंह के एडवांस्ड कैंसर की ​कॉम्प्लेक्स सर्जरी सफलतापूर्वक की। कैंसर मुंह के आसपास की मांसपेशियों, त्वचा और जबड़े की हड्डियों तक फैल गया था। इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी में कैंसर से प्रभावित टिशूस को निकालने के साथ-साथ मरीज की जांघ से टिशूस लेकर गाल और मुंह के क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और स्थिर अवस्था में उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।

कृष्ण कुमार को तंबाकू चबाने और शराब के सेवन की आदत थी। पिछले लगभग छह महीनों से उनके बाएं गाल के अंदर एक घाव लगातार बढ़ रहा था। इसके साथ उन्हें दर्द और मुंह खोलने में गंभीर परेशानी हो रही थी। इससे पहले वह दूसरे हॉस्पिटल में कीमोथेरेपी के चार साइकिल ले चुके थे, लेकिन इसके बावजूद कैंसर बढ़ता रहा। 

ट्यूमर के आकार में वृद्धि के कारण उनके मुंह के अंदर की जांच करना भी बेहद मुश्किल हो गया था। कैंसर आसपास के टिशूस तक फैल चुका था, जिससे उपचार और अधिक ​कॉम्प्लेक्स हो गया था।


इसके बाद मरीज ने बेहतर उपचार के लिए बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रोबोटिक एवं मिनिमली इनवेसिव हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड - डॉ. गोपाल कुमार से संपर्क किया।

मामले पर बात करते हुए, डॉ. गोपाल कुमार, ने कहा, “यह एक चुनौतीपूर्ण मामला था, क्योंकि कीमोथेरेपी के चार ​साइकल्स के बाद भी कैंसर बढ़ रहा था और मुंह के आसपास की कई महत्वपूर्ण संरचनाओं को प्रभावित कर चुका था। मरीज के लिए मुंह खोलना भी बेहद मुश्किल हो गया था, जिसके कारण चिकित्सकीय जांच करना चुनौतीपूर्ण था। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए हमने सर्जरी में और देरी न करने का निर्णय लिया। हमारा मुख्य उद्देश्य कैंसर को उसके आसपास पर्याप्त स्वस्थ टिशूस सहित पूरी तरह निकालना और साथ ही सर्जरी से प्रभावित हिस्से का यथासंभव प्रभावी पुनर्निर्माण करना था।”


सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने निचले जबड़े के प्रभावित हिस्से, ऊपरी जबड़े के एक हिस्से, गाल के आसपास के गहरे टिशूस और मांसपेशियों के साथ-साथ ऊपर की त्वचा को भी निकाला। इसके अलावा, गर्दन के बाईं ओर की लिम्फ नोड्स को भी हटाया गया। सर्जरी के कारण बने बड़े घाव और टिशूस की कमी को पूरा करने के लिए डॉक्टरों ने माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें मरीज की जांघ से त्वचा, टिशूस और ब्लड वेसेल्स सहित एक हिस्सा लेकर प्रभावित क्षेत्र में लगाया गया। इस तकनीक को एंटेरोलैटरल थाई (एएलटी) फ्री फ्लैप कहा जाता है। इसमें नई जगह पर प्रत्यारोपित टिशूस की रक्त आपूर्ति बहाल करने के लिए उनकी ब्लड वेसेल्स को संबंधित ब्लड वेसेल्स से जोड़ा जाता है। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी सामान्य रही। अंतिम जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ट्यूमर को स्पष्ट सर्जिकल मार्जिन के साथ निकाल दिया गया था, यानी निकाले गए टिशूस के किनारों पर कैंसर सेल्स नहीं मिलीं।  


डॉ. गोपाल कुमार ने आगे कहा, “इस मामले में कैंसर को निकालना उपचार का केवल एक हिस्सा था। सर्जरी के दौरान हुए व्यापक नुकसान की भरपाई करना और प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण था। मरीज ने सर्जरी के बाद अच्छी रिकवरी की है, लेकिन एडवांस्ड कैंसर के मामलों में स्पष्ट सर्जिकल मार्जिन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि पूरा उपचार समाप्त हो गया है। मरीज को आगे कीमोरेडिएशन थेरेपी कराने और नियमित फॉलो-अप में रहने की सलाह दी गई है, ताकि उसकी रिकवरी पर नजर रखी जा सके और कैंसर की दोबारा वापसी की आशंका का समय रहते पता लगाया जा सके।”


मरीज को अस्थायी फीडिंग ट्यूब और सर्जिकल ड्रेन के साथ स्थिर अवस्था में हॉस्पिटल से छुट्टी दी गई, ताकि रिकवरी के दौरान उसे आवश्यक पोषण और उचित देखभाल मिल सके। फिलहाल वह मिर्जापुर में डॉक्टरों की सलाह के अनुसार कीमोरेडिएशन थेरेपी ले रहा है। कैंसर स्थानीय स्तर पर काफी फैल चुका था, इसलिए आगे का उपचार और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।

यह मामला मुंह में लंबे समय तक बने रहने वाले घाव, बिना किसी स्पष्ट कारण के दर्द या मुंह खोलने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। खासकर तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। कैंसर की समय पर पहचान और उचित उपचार से बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।

P.K. SHARMA

Blogging in difference subjects since 2012 and related many media companies, having experiences in this field about 12 years.

Post a Comment

Previous Post Next Post