लगातार थकान और हड्डियों का दर्द हो सकता है बोन मैरो कैंसर का संकेत

लगातार थकान और हड्डियों का दर्द हो सकता है बोन मैरो कैंसर का संकेत

पटना: बोन मैरो कैंसर एक गंभीर बीमारी हैजिसमें शरीर की स्वस्थ ब्लड सेल्स बनाने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसका सीधा असर ऑक्सीजन सप्लाईइम्युनिटी और ब्लड क्लॉटिंग पर पड़ता है। शुरुआती लक्षण जैसे बिना वजह थकानबार-बार इन्फेक्शन या हड्डियों में दर्द अक्सर आम कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैंजिससे बीमारी की पहचान देर से होती है। इसलिए अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहेतो डॉक्टर से समय पर सलाह लेना बेहद जरूरी है। 


बोन मैरो कैंसर तब होता है जब बोन मैरो के अंदर असामान्य सेल्स अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगते हैं और नॉर्मल ब्लड सेल्स के बनने की प्रक्रिया में रुकावट डालते हैं। इससे शरीर में खून की कमीइन्फेक्शन से लड़ने की ताकत में कमी और ब्लीडिंग कंट्रोल में परेशानी हो सकती है। कई मामलों में हड्डियां कमजोर हो जाती हैंदर्द या फ्रैक्चर का रिस्क बढ़ जाता है और शरीर के अन्य अंगों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। चूंकि हर मरीज में बीमारी की गति और गंभीरता अलग हो सकती हैइसलिए इसकी सही मॉनिटरिंग और समय पर इलाज बहुत अहम होता है। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत के हीमैटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टरडॉ. रेयाज़ अहमद ने बताया कि “बोन मैरो कैंसर के प्रमुख प्रकारों में ल्यूकेमियामल्टीपल मायलोमा और कुछ प्रकार के लिम्फोमा शामिल हैं। ल्यूकेमिया में व्हाइट ब्लड सेल्स असामान्य रूप से बढ़ जाते हैंजिससे एनीमियाइन्फेक्शन का खतरा और ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। यह एक्यूट या क्रॉनिक दोनों तरह का हो सकता है। मल्टीपल मायलोमा प्लाज़्मा सेल्स को प्रभावित करता हैजिससे हड्डियां कमजोर होती हैंकिडनी पर असर पड़ सकता है और इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। वहीं कुछ लिम्फोमा ऐसे होते हैं जो बोन मैरो तक फैल जाते हैं और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देते हैं। इनके अलावा कुछ रेयर कंडीशन्स जैसे मायलोडिसप्लास्टिक सिंड्रोम और मायलोप्रोलिफेरेटिव नियोप्लाज़्म भी होते हैंजो आगे चलकर गंभीर कैंसर का रूप ले सकते हैं।“ 


इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। लगातार थकान और कमजोरीथोड़ी मेहनत में सांस फूलनाबार-बार सर्दी-खांसी या अन्य इन्फेक्शनआसानी से चोट लगना या खून बहनाऔर लंबे समय तक रहने वाला हड्डियों या जोड़ों का दर्द इसके आम संकेत हैं। कुछ मरीजों में अचानक वजन कम होनाबुखारनाइट स्वेट्स या गर्दनबगल और ग्रोइन में लिम्फ नोड्स की सूजन भी देखी जा सकती है। इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहतर इलाज और अच्छे परिणामों के लिए बहुत जरूरी है। 


डॉ. रेयाज़ ने आगे बताया कि “बोन मैरो कैंसर का सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होतालेकिन यह बोन मैरो सेल्स के डीएनए में बदलाव की वजह से होता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता हैखासकर 50 साल के बाद। कुछ मामलों में जेनेटिक फैक्टरपहले से मौजूद ब्लड डिसऑर्डररेडिएशन एक्सपोज़रपुराने कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट या बेंजीन जैसे हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आने से जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि लाइफस्टाइल सीधे तौर पर इसका कारण नहीं बनतीलेकिन कमजोर इम्युनिटी और खराब ओवरऑल हेल्थ बीमारी को बढ़ावा दे सकती है। बोन मैरो कैंसर का इलाज बीमारी के प्रकारस्टेज और मरीज की कुल सेहत पर निर्भर करता है। अक्सर एक से ज्यादा ट्रीटमेंट का कॉम्बिनेशन अपनाया जाता है। कीमोथेरेपी कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मदद करती है और कई मामलों में रेमिशन लाने में प्रभावी होती है। रेडिएशन थेरेपी खास हिस्सों में दर्द कम करने और ट्यूमर साइज घटाने के लिए दी जाती है।“ 


स्टेम सेल या बोन मैरो ट्रांसप्लांट में खराब मैरो की जगह स्वस्थ सेल्स डाली जाती हैंजिससे नॉर्मल ब्लड सेल्स का निर्माण दोबारा शुरू हो सके। इसके अलावा टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी एडवांस ट्रीटमेंट्स कैंसर सेल्स को ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बनाती हैं और कई मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई हैं। सही समय पर सही इलाज से आज बोन मैरो कैंसर के मरीज बेहतर और लंबी जिंदगी जी पा रहे हैं।

P.K. SHARMA

Blogging in difference subjects since 2012 and related many media companies, having experiences in this field about 12 years.

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